Thursday, 17 January 2013

दर्द



एक तो उन्हें बेदर्दी से,आपने रुला दिया /
राज दिलका सारा,रुलाकर खुला दिया //
उनके रोने पे आप,हंसने की बात करते हो ?/
बड़े ही बेदर्द हो,ये कैसी मुलाक़ात करते हो ?//
माना कि उनकी याद में,बहुत रोये हो /
तन्हा-तन्हा अँधेरी,रातों में सोये हो //
काश ! रुलाने का सिला,प्यार उनके दामन में डालते /
तो शायद वरमाला पहनाकर,वे दिल आपपर उछालते //

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